थॉड बना 'छेद वाली छतरी', ईरानी हमलों ने उजागर किया अमेरिकी डिफेंस सिस्टम का सच, खाड़ी देशों के अरबों डॉलर बर्बाद?

अमेरिकी air defense प्रणालियों को दुनिया की सबसे उन्नत और विश्वसनीय प्रणालियों में गिना जाता था। लेकिन ईरानी जवाबी हमलों ने इस reputation को चुनौती दे दी है। 28 फरवरी के बाद शुरू हुए इन हमलों ने खाड़ी देशों में तैनात अमेरिकी प्रणालियों की कमजोरी को उजागर किया, जिसमें थाड (THAAD) और पैट्रियट PAC-3 जैसी प्रणालियां शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की मिसाइलों और ड्रोन ने उन targets को सटीक रूप से हिट किया, जहां ये प्रणालियां तैनात थीं।

खाड़ी देशों ने अरबों डॉलर का निवेश अमेरिकी सैन्य तकनीक में किया है, विशेषकर सऊदी अरब ने 142 अरब डॉलर के arms deal में THAAD और पैट्रियट प्रणालियों को शामिल किया था। ये प्रणालियां बैलिस्टिक मिसाइलों को अंतिम चरण में मार गिराने और कम दूरी के खतरों से निपटने के लिए डिज़ाइन की गई थीं। लेकिन ईरान की मिसाइलों ने इनकी effectiveness पर सवाल खड़े कर दिए।

सैटेलाइट तस्वीरों ने साफ दिखाया कि जॉर्डन, सऊदी अरब और यूएई में स्थित THAAD के AN/TPY-2 रडार, जिन्हें प्रणाली की 'आंखें' कहा जाता है, को सीधे निशाना बनाया गया। सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर रडार के लिए बने shelter का मलबा बचा, जबकि यूएई में अल रुवैस के पास थाड बैटरी के structures भी क्षतिग्रस्त हुए।

पैट्रियट प्रणाली भी चुनौतियों के सामने खड़ी हुई। ईरान के सस्ते ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों की बड़ी संख्या ने इसकी interception capacity को चुनौती दी। विशेषज्ञों का कहना है कि large-scale attacks के खिलाफ ये प्रणालियां सीमित साबित हुईं। ईरान के हमले ने यह साबित किया कि जिन प्रणालियों को impenetrable shield के रूप में बेचा गया, वे वास्तव में leaky umbrella साबित हो रही हैं।

इस घटना ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य reliance पर गहरी बहस छेड़ दी है। क्या वास्तव में इन प्रणालियों पर इतना बड़ा निवेश उचित था? अब इन देशों के लिए यह सवाल ज्यादा से ज्यादा रणनीतिक स्वायत्तता की आवश्यकता को उजागर करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह घटना regional security के भविष्य को लेकर भी चिंताएं बढ़ा रही है।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • सागर

    अरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी अगर defense system फेल हो जाए, तो विश्वास कैसे बनाए रखें?

  • प्रियंका

    अमेरिका ने इन प्रणालियों को 'गोल्ड स्टैंडर्ड' कहा था, लेकिन अब लगता है marketing claim महज एक झांसा था।

  • राहुल

    ईरान के सस्ते ड्रोन ने महंगे अमेरिकी सिस्टम को चकमा दे दिया। cost-effectiveness के मामले में यह बड़ा सबक है।

  • निहार

    सैटेलाइट तस्वीरें तो साफ दिखा रही हैं कि radar systems को सीधे निशाना बनाया गया। कोई नई रणनीति होगी।

  • अंजलि

    अब खाड़ी देशों को अमेरिका के अलावा भी विकल्प तलाशने होंगे। strategic dependence खतरनाक हो सकती है।

  • विकास

    अगर थाड और पैट्रियट फेल हो सकते हैं, तो आगे के लिए defense policy पर दोबारा विचार करना होगा।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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