तमिलनाडु में स्टालिन ने बदला रुख, NDA के खिलाफ DMK का ये है नया चुनावी दांव
तमिलनाडु में आने वाले election के मद्देनजर डीएमके ने अपनी रणनीति में एक बड़ा shift किया है। पहले विकास, भाषा और क्षेत्रवाद के मुद्दों पर चल रहे अभियान को अब 'द्रविड़ गौरव' के संदर्भ में तेज कर दिया गया है। इसके पीछे कारण है — लोकसभा में परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण संशोधन बिल के साथ लाए जाने का प्रयास विफल रहा। डीएमके ने इस विफलता को central government की हार के रूप में पेश किया और तमिल अस्मिता की जीत घोषित कर दी।
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने इस मुद्दे को लेकर एक स्पष्ट stance अपनाई है। उन्होंने कहा कि 'हमारे सिर पर लटकी तलवार अब हम पर आ गिरी है', जिससे राज्य के लोगों में fear और चिंता की भावना बढ़ी। जब बिल गिर गया, तो स्टालिन ने उसकी कॉपी जलाकर विरोध दर्ज कराया और X पर लिखा — 'तमिलनाडु ने दिल्ली को शिकस्त दे डाली!' इस घटना को अब चुनाव प्रचार का केंद्र बनाया जा रहा है।
अब प्रचार घर-घर तक पहुंच रहा है, जहां campaign workers स्टालिन की जीत के पर्चे बांट रहे हैं और लोगों को बता रहे हैं कि केवल वही राज्य के अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं। 'तमिल गौरव' के नाम पर लड़ाई को अब 'द्रविड़ गौरव' के रूप में बढ़ाया जा रहा है। डीएमके इसे तमिलनाडु बनाम दिल्ली के battle के तौर पर दिखा रही है, जहां तमिल अस्मिता ने दिल्ली के अहंकार को हराया।
इस बीच, बीजेपी ने अपनी रणनीति बदलकर महिला आरक्षण बिल के नाम पर विपक्ष को घेरना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कोयंबटूर में एक जनसभा में डीएमके पर हमला किया और उसे परिवारवाद का दोषी ठहराया। वहीं, AIADMK नेता पलानीस्वामी ने बताया कि अमित शाह ने तमिलनाडु के साथ no discrimination का आश्वासन दिया है।
स्टालिन ने विपक्षी एकता को भी मजबूत करने की कोशिश की है। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात की और उनके समर्थन के लिए आभार जताया। खड़गे ने कहा था कि पूरा भारत स्टालिन के साथ खड़ा है — यह बात डीएमके के प्रचार में बार-बार दोहराई जा रही है। स्टालिन का दावा है कि डीएमके 200 से अधिक सीटें जीतेगी और तमिलनाडु को एनडीए के destructive force से बचाएगी।
हर चुनाव में एक ही कहानी — दिल्ली बुरी, तमिलनाडु अच्छा। लेकिन real issues असली मुद्दे कहां हैं? बेरोजगारी, शिक्षा, बुनियादी सुविधाएं?
स्टालिन ने सही किया! केंद्र ने हमारी पहचान को खतरे में डाला था। अब उन्हें पता चल गया कि तमिल pride गौरव को कैसे बचाया जाता है।
तमिलनाडु के लोगों को लगता है कि दिल्ली उनके खिलाफ है। लेकिन क्या every policy हर नीति वाकई उनके खिलाफ है या सिर्फ राजनीति चल रही है?
राहुल जी ने भी सही कहा — स्टालिन अकेले नहीं हैं। विपक्ष की unity एकता अब दिखने लगी है। उम्मीद है, यह आगे बढ़े।
अगर DMK 200+ सीटें जीतती है, तो यह वाकई बड़ा बहुमत होगा। लेकिन क्या वोट अभी भी विकास पर नहीं, बल्कि भावनाओं पर आधारित हैं?
महिला आरक्षण बिल गिर गया, लेकिन अब इसके नाम पर राजनीति हो रही है। क्या women's rights महिलाओं के अधिकार वाकई इन सबके प्राथमिकता में हैं?