चीन को ईरानी तेल नहीं लेने देंगे, हॉर्मुज में नाकेबंदी के बीच अमेरिका के वित्त मंत्री का बड़ा ऐलान
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, हॉर्मुज जलडमरूमध्य, पर अमेरिका ने एक मजबूत financial pressure शुरू कर दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने वाशिंगटन में पत्रकारों को सीधे कहा कि चीनी टैंकरों को ईरान से तेल लेकर इस जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह कदम ईरान के तेल निर्यात पर सीधा economic impact डालता है और चीन की ऊर्जा आपूर्ति योजना को चुनौती देता है।
ईरान का 80 प्रतिशत से अधिक तेल चीन खरीदता है, जो पिछले साल प्रतिदिन लगभग 14 लाख बैरल तक पहुँच गया। बेसेंट ने स्पष्ट किया कि चीन को किसी भी तेल की आपूर्ति रोकने की बात नहीं है, बशर्ते वह ईरानी तेल न हो। इस warning का उद्देश्य सीधे चीन के ऊर्जा आयात मॉडल पर direct pressure डालना है।
मंत्री ने चीन पर global partner होने में अविश्वसनीयता का आरोप भी लगाया। उनका आरोप है कि चीन ने न केवल तेल जमा किया है, बल्कि एशिया के अन्य देशों को जेट ईंधन और अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं का निर्यात भी रोक दिया है। यह claim चीन के आर्थिक व्यवहार के प्रति अंतरराष्ट्रीय concern को बढ़ा सकता है।
इस बीच, एक चीनी टैंकर, रिच स्टारी, जो ईरान से तेल लेकर आ रहा था, हॉर्मुज जलडमरूमध्य के मुहाने पर पहुँचकर वापस मुड़ गया। यह अमेरिकी threat के तुरंत बाद हुआ, जिससे संकेत मिलता है कि चीनी ऑपरेटर अमेरिकी नीति के प्रति गंभीरता से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
चीन ने इस बीच सभी पक्षों से युद्धविराम का पालन करने और बातचीत के माध्यम से conflict resolution की अपील की है। बीजिंग का तर्क है कि जलडमरूमध्य में normal traffic को तुरंत बहाल होना चाहिए। वहीं, बेसेंट ने कहा कि ट्रंप की बीजिंग यात्रा पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा, और केवल लॉजिस्टिक कारणों से ही कोई बदलाव हो सकता है।
अमेरिका चीन पर दबाव डालने के लिए ईरान के तेल को हथियार बना रहा है। लेकिन क्या यह economic risk आर्थिक जोखिम वैश्विक बाजार को अस्थिर कर देगा?
चीन का तेल जमा करना और निर्यात रोकना वाकई चिंताजनक है। लेकिन क्या अमेरिका global pressure वैश्विक दबाव का इस्तेमाल सिर्फ अपने राजनीतिक फायदे के लिए कर रहा है?
प्रतिदिन 14 लाख बैरल तेल की आदत आसानी से नहीं टूटेगी। अगर आपूर्ति रुकी तो चीन को energy shortage ऊर्जा की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
बेसेंट कहते हैं कि यात्रा नहीं टलेगी, लेकिन ऐसा लगता है कि तनाव पहले से ही diplomatic tension राजनयिक तनाव बढ़ा रहा है।
हॉर्मुज केवल तेल का मार्ग नहीं, दुनिया की आर्थिक सांस है। इस पर नाकेबंदी किसी भी देश के लिए risky decision जोखिम भरा फैसला होगा।
रिच स्टारी का यू-टर्न अमेरिकी नीति की immediate impact त्वरित प्रतिक्रिया दिखाता है। अब देखना यह है कि चीन अगला कदम क्या होगा।