होर्मुज में ट्रंप की नाकाबंदी का ईरान ने निकाला तोड़, दूसरे बंदरगाहों का कर रहा इस्तेमाल
इस्लामाबाद में विफल शांति वार्ता के बाद अब global tension का केंद्र फारस की खाड़ी में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया है। अमेरिका ने ईरान के पूर्वी बंदरगाहों और तटीय इलाकों पर naval blockade लगा दी है, जिसके तहत ईरान से आने-जाने वाले सभी जहाजों को रोकने या जब्त करने की चेतावनी दी गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह action किसी भी राष्ट्र के जहाज पर हो सकती है, बशर्ते वह ईरानी बंदरगाहों से जुड़ा हो।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरानी जहाजों के खिलाफ नौसेना की कार्रवाई उसी तरह होगी जैसी वेनेजुएला तट पर drug traffickers के खिलाफ की जाती रही है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में sharp rise ला दी, क्योंकि होर्मुज दुनिया के लिए तेल की आपूर्ति में एक महत्वपूर्ण रुकावट है। हालांकि, अमेरिका ने यह स्पष्ट किया है कि मानवीय सहायता ले जा रहे जहाजों पर कोई restriction नहीं होगा।
इस नाकाबंदी के जवाब में ईरान ने कई strategies अपनाई हैं। इनमें समुद्र में तेल का floating storage , शैडो फ्लीट (गुप्त टैंकर) का उपयोग और alternative ports की ओर रुख शामिल है। मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईरान पहले ही 190 मिलियन बैरल कच्चा तेल समुद्र में स्टोर कर चुका है, जो चीन जैसे देशों की जरूरतें लगभग 120 दिनों तक meet कर सकता है।
अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि गैर-ईरानी जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाएगा, लेकिन वे जहाज जो ईरान से जुड़े होंगे, उन पर action हो सकती है। यह कदम क्षेत्र में military escalation की आशंका बढ़ा रहा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर नाकाबंदी जारी रही, तो वह खाड़ी में अमेरिकी allies को निशाना बना सकता है।
इस पूरे संकट का अंत या तो ईरान पर बढ़ते economic pressure के जरिए बातचीत की मेज पर वापस लाने में हो सकता है, या फिर एक खुले military conflict में तब्दील हो सकता है। अगर तनाव बढ़ता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में massive spike आ सकता है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा।
अगर तेल की कीमतें बढ़ीं, तो यह सीधे ईंधन और परिवहन cost लागत पर असर डालेगा।
ट्रंप बार-बार ड्रग तस्करों का जिक्र कर रहे हैं, लेकिन यहां तो geopolitical game भू-राजनीतिक खेल चल रहा है।
ईरान का फ्लोटिंग स्टोरेज एक चालाक move कदम है, लेकिन क्या यह लंबे समय तक चलेगा?
क्या अमेरिका वाकई मानवीय सहायता वाले जहाजों को छोड़ देगा? इस claim दावे पर भरोसा कैसे करें?
होर्मुज बंदरगाह दुनिया के लिए इतना critical महत्वपूर्ण क्यों है? कुछ लोगों को इसकी जानकारी नहीं है।
सैन्य संघर्ष की स्थिति में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। यह risk जोखिम बहुत बड़ा है।