राघव चड्ढा को Z सुरक्षा: पंजाब से वापसी के बाद केंद्र ने लिया बड़ा कदम

पंजाब सरकार ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता राघव चड्ढा की security वापस लेने के ठीक बाद, केंद्र सरकार ने उन्हें Z security कवर दे दिया है। अब दिल्ली और पंजाब में उन्हें full protection मिलेगी, जबकि अन्य स्थानों पर उन्हें Y प्लस सुरक्षा मिलेगी। यह फैसला गृह मंत्रालय ने intelligence report के आधार पर लिया है, जिसमें आईबी ने threat perception जारी किया था।

इस पृष्ठभूमि में AAP के आंतरिक tension साफ दिख रहे हैं। कुछ दिनों पहले पार्टी ने चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से हटा दिया था और उन्हें सदन में बोलने से भी रोक दिया था। इसके बाद चड्ढा ने पार्टी पर लगातार आरोप लगाए और कहा कि उन्हें silenced किया जा सकता है, लेकिन defeated नहीं जा सकता। उनकी जगह अशोक मित्तल को नया उपनेता बनाया गया, जिनके खिलाफ उसी दिन प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की।

राघव चड्ढा के साथ पार्टी के बगावती relationship कई महीनों से बिगड़ रहे थे। जब मुख्य नेता जेल में थे, तो चड्ढा ने उनके लिए कोई जोरदार support नहीं किया, जिससे पार्टी नेतृत्व नाराज हुआ। यहां तक कि उनकी चुप्पी को लेकर बचाव भी किया गया था कि वह medical treatment के लिए विदेश थे।

अब जेड सिक्योरिटी का मतलब है कि सरकार उन्हें 22 सुरक्षाकर्मियों की protection cover देगी, जिसमें 4 से 6 NSG कमांडो भी शामिल होंगे। यह उच्चतम security level में से एक है। इस फैसले ने न केवल चड्ढा की personal safety को बदल दिया है, बल्कि पंजाब और दिल्ली के बीच political trust पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • अर्जुन_पी

    Y प्लस से Z सिक्योरिटी का बदलाव सिर्फ symbolic नहीं है, यह खर्च भी बढ़ाएगा। केंद्र का बजट अब इसे संभालेगा?

  • नीति_चर्चा

    अगर पंजाब सरकार ने सुरक्षा वापस ली, तो केंद्र का दखल direct intervention जैसा लगता है। क्या यह संवैधानिक balance बिगाड़ेगा?

  • सच्ची_बात

    चड्ढा को खामोश करने की कोशिश, अब उल्टा उन्हें Z सिक्योरिटी मिली। क्या व्यंग्य है या गलत संकेत?

  • मनोज_दिल्ली

    22 सुरक्षाकर्मी? यह तो मुख्यमंत्री जैसी protection है। क्या राजनीतिक exposure इतना बढ़ गया है?

  • प्रिया_एस

    अशोक मित्तल के खिलाफ छापे और चड्ढा को सुरक्षा — एक ही दिन में। कोई coincidence नहीं लगता।

  • राज_जानकार

    खुफिया रिपोर्ट के आधार पर फैसला हुआ, लेकिन क्या यह real threat है या political tool ?

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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