गाजियाबाद के जिला अस्पताल में बढ़ेंगी सुविधाएं, कैंसर, हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज के मरीजों को मिलेगा लाभ
गाजियाबाद के जिला एमएमजी अस्पताल में medical facilities का विस्तार किया जा रहा है, जिससे कैंसर, हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज जैसी गंभीर बीमारियों के patients को बड़ा लाभ मिलेगा। यह अस्पताल जिले का सबसे पुराना और 166 बेड वाला सार्वजनिक अस्पताल है, जहाँ रोजाना तीन हजार से अधिक मरीज आते हैं। अब यहाँ कैंसर के मरीजों के लिए MRI scans और chemotherapy की सुविधा जल्द शुरू होगी, जिसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
कैंसर मरीजों के लिए एक डे केयर सेंटर पहले से बनाया जा चुका है, जिसमें पांच बेड का वार्ड तैयार किया गया है और प्राइवेट वार्ड के तीन कक्ष आरक्षित कर दिए गए हैं। इसके अलावा, budget allocation की प्रतीक्षा है ताकि एमआरआई सेंटर को जल्द चालू किया जा सके।
हृदय रोग के मरीजों के लिए भी अहम सुविधाएँ जोड़ी जा रही हैं। ईको जांच के लिए नई मशीन खरीदी जाएगी, और हार्ट अटैक व ब्रेन हेमरेज के मरीजों को तुरंत बचाव के लिए injection facilities — जैसे टेनेक्टप्लेस और स्ट्रेप्टोनेज — पहले से लगाई जा रही हैं। इन उपचारों की उपलब्धता से emergency response में सुधार होगा और जान बचने की संभावना बढ़ेगी।
इसके अलावा, बर्न केस के मरीजों के लिए सर्जरी की व्यवस्था भी की जा रही है। पैथालॉजी लैब में जांच के दायरे को बढ़ाने के लिए नए उपकरण मांगे गए हैं। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के लिए मशीन की मांग सीएसआर फंड से की गई है। शासन को एक पत्र के माध्यम से हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती का भी अनुरोध किया गया है।
डॉ. राकेश कुमार, सीएमएस जिला एमएमजी अस्पताल, के अनुसार, क्रिटीकल केयर ब्लॉक के निर्माण से पहले ही कई सुविधाएँ शुरू कर दी गई हैं, जिससे मरीजों को better care मिल सकेगी। इन बदलावों से न केवल उपचार की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि मरीजों को अन्य बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाने की जरूरत भी कम होगी।
कैंसर मरीजों के लिए कीमोथैरेपी जैसी critical treatment महत्वपूर्ण चिकित्सा का अस्पताल में आना बहुत बड़ी बात है। अब लोगों को दिल्ली या नोएडा नहीं जाना पड़ेगा।
लेकिन क्या ये सभी सुविधाएँ वाकई लागू हो पाएँगी? अक्सर government promises सरकारी वादे बस कागजों तक सीमित रह जाते हैं।
हर छोटे अस्पताल में emergency injection आपातकालीन इंजेक्शन की सुविधा होनी चाहिए। ये जान बचाने वाला कदम है।
मरीजों की संख्या तीन हजार प्रतिदिन है — इतने लोगों के लिए क्या बुनियादी ढांचा काफी होगा? infrastructure इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी ध्यान देना जरूरी है।
डे केयर सेंटर तो बन गया, लेकिन budget delay बजट में देरी से एमआरआई जैसी सुविधाएँ अटकी रहती हैं। यही बड़ी समस्या है।
हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती की मांग सही है। specialist availability विशेषज्ञों की उपलब्धता ही ग्रामीण और सार्वजनिक अस्पतालों की कमजोरी है।