गर्मी में भी हरियाली: यह तकनीक बचाएगी फसल और बढ़ाएगी मुनाफा
45 से 50 डिग्री तक पहुंच सकता है तापमान, और फिर भी खेतों में हरियाली बनी रहे? यह कल्पना नहीं, reality है — अगर किसान आज जैविक मल्चिंग जैसी सरल तकनीक अपनाएं। देश के कई हिस्सों, खासकर मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में, तापमान पहले ही 42 डिग्री के पार पहुंच चुका है। ऐसे में फसलों को protect रखना चुनौती बन गया है। लेकिन कृषि विशेषज्ञों का कहना है: इंसानों की तरह फसलों को भी गर्मी में care की जरूरत होती है। और यहीं जैविक मल्चिंग एक shield बन जाती है।
यह तकनीक इतनी आसान है कि हर किसान इसे अपना सकता है। गेहूं का भूसा, धान का पुआल, सूखी पत्तियां — ये सब कुछ जैविक मल्च के तौर पर खेत में फैलाया जा सकता है। इससे मिट्टी की सतह ढक जाती है, नमी बरकरार रहती है और पानी का वाष्पीकरण कम हो जाता है। पौधों की जड़ों तक तेज धूप का असर नहीं पहुंच पाता। परिणाम? फसलें लंबे समय तक healthy रहती हैं और सिंचाई की आवृत्ति कम हो जाती है।
उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेषज्ञ ड्रिप सिंचाई की भी सलाह देते हैं। यह तकनीक पानी की wastage रोकती है और पौधों को बूंद-बूंद पानी मिलता है। इससे न सिर्फ उत्पादन बढ़ता है, बल्कि फसल की quality भी सुधरती है। इसके अलावा, खेत के किनारे पेड़-पौधे लगाने से लू और तेज हवाओं से भी protection मिलती है।
कृषि सलाहकार नवनीत रेवापाटी के अनुसार, यह तकनीक न सिर्फ कम लागत वाली है, बल्कि लंबे समय में मुनाफा भी बढ़ा सकती है। गर्मी में फसलों की growth , flowers और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। लेकिन सही समय पर सही उपाय अपनाने से नुकसान टाला जा सकता है। और शायद, इस गर्मी में भी, किसान अपने खेतों में profit कमा सकें।
ड्रिप सिंचाई तो अच्छी है, लेकिन शुरुआती लागत ज्यादा है। क्या छोटे किसानों के लिए कोई सब्सिडी योजना है?
भूसा और पुआल तो हर खेत में मिल जाता है। यह तकनीक सच में simple आसान और प्रभावी है।
50 डिग्री में भी फसल बचेगी? यह थोड़ा ज्यादा लग रहा है। कोई evidence प्रमाण है?
मैंने पिछले साल मल्चिंग आजमाई। पानी की बचत हुई और उत्पादन भी बढ़ा। practical व्यावहारिक फायदा है।
पेड़ लगाना तो बहुत अच्छा विचार है। पर्यावरण के साथ-साथ फसल को भी लाभ।
ड्रिप इरिगेशन + मल्चिंग = आधुनिक खेती का perfect बेहतरीन संयोजन।