लू ने घेरा मैदान, बर्फबारी लाएगी पहाड़ों पर राहत
उत्तराखंड में गर्मी ने दो चेहरे दिखाए हैं: एक तरफ मैदानों में heat का प्रकोप इतना भीषण है कि देहरादून में स्कूल और anganwadi बंद हैं, तो दूसरी ओर पहाड़ों की चोटियों पर relief का संकेत मिल रहा है। administration ने बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए यह फैसला लिया, क्योंकि हीट वेव के कारण हीट स्ट्रोक और निर्जलीकरण का खतरा मंडरा रहा है। लू के इस तूफान में सूरज की तपिश लोगों को पूरी तरह से झुलसा रही है।
पहाड़ी जिलों जैसे पौड़ी और टिहरी में भी स्थिति गंभीर है। शुष्क मौसम और rising तापमान के कारण जंगलों में आग लगने की risk बढ़ गई है। यहां के forest सूख चुके हैं, और किसी छोटी सी चिंगारी से विस्फोटक स्थिति बन सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने warning जारी कर स्पष्ट किया है कि अत्यधिक गर्मी से हीट रैश, ऐंठन और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
लेकिन उम्मीद की किरण है। 27 अप्रैल से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम बदलना शुरू हो गया है। higher इलाकों में हल्की बर्फबारी और light rain होने की संभावना है, जिससे पहाड़ों की रातें ठंडी हो जाएंगी। मौसम विभाग ने 28 अप्रैल से पूरे प्रदेश में येलो अलर्ट जारी किया है, जिसके तहत आंधी-बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है। तेज हवाएं 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी।
इस तूफानी सुधार के बाद तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है, जो मैदानों में गर्मी से respite दिलाएगी। लोगों को सलाह दी गई है कि वे दोपहर के समय घरों में रहें और शरीर में fluids की कमी न होने दें। बाहर निकलें तो हल्के, cotton कपड़े पहनें और खुले में न घूमें।
पहाड़ों की यात्रा कर रहे लोगों को advised दी गई है कि वे snowfall और फिसलन को देखते हुए गर्म कपड़े साथ रखें। आंधी के समय इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग न करें और पालतू जानवरों को सुरक्षित स्थान पर रखें। यह मौसमी उथल-पुथल सिर्फ एक फॉरेकास्ट नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य चुनौती है जो हमें सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की याद दिलाती है।
देहरादून में लू के कारण बच्चों की सेहत खतरे में है। छुट्टी सही फैसला है। children बच्चे अत्यधिक गर्मी में जल्दी थक जाते हैं।
पौड़ी में तो लगता है जंगल खुद ही आग की मांग कर रहे हैं। सूखा इतना कि dry सब कुछ धूल में तब्दील हो रहा है।
हमारे यहां के बुजुर्ग कहते हैं — बारिश के बाद हवा बदलती है। उम्मीद है weather मौसम अब सही होगा।
हीट स्ट्रोक छोटी बीमारी नहीं है। चिकित्सा आपातकाल बन सकता है। लोग लापरवाही न बरतें।
कल नैनीताल जा रहा था, लेकिन अब येलो अलर्ट देखकर सोच रहा हूं। कहीं फंस न जाऊं।
आंगनबाड़ी बंद होने से कई बच्चों को पोषण भोजन नहीं मिलेगा। सरकार को इसकी भी योजना बनानी चाहिए।
धूल भरी आंधी में बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। आंखें भी खराब होने लगती हैं। visibility दृश्यता शून्य हो जाती है।
बच्चों के लिए तो छुट्टी अच्छी बात है, लेकिन काम पर जाने वाली मां के लिए चुनौती भी है। दोनों तरफ से दबाव है।