सुरक्षा वापसी या राजनीतिक संकेत? हरभजन सिंह के आसपास उठे सवाल
जब सुबह के उस वक्त security को जालंधर में हरभजन सिंह के आवास से वापस बुला लिया गया, तो यह सिर्फ एक प्रोटोकॉल बदलाव नहीं लग रहा था — यह पंजाब की राजनीति के तापमान में उछाल का संकेत था। पूर्व क्रिकेटर और आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य की जेड प्लस cover वापस लेने का फैसला राज्य सरकार की ओर से आया, लेकिन इसके तुरंत बाद केंद्र ने उन्हें दोबारा सुरक्षा प्रदान कर दी। यह झटका ऐसे समय आया जब पार्टी के भीतर crack और बगावत की खबरें तेज हो रही थीं।
इस खेल में एक नाम सामने आया — राघव चड्ढा। जब वे भाजपा में शामिल हुए, तो उनकी सुरक्षा में भी बदलाव आया था, लेकिन तब केंद्र ने तुरंत action करते हुए उन्हें जेड प्लस सुरक्षा दे दी थी। अब वही रास्ता हरभजन सिंह के लिए भी खुल गया। राघव ने दावा किया कि सात राज्यसभा सदस्य पार्टी छोड़ने वाले हैं, जिनमें हरभजन का नाम भी शामिल है। आप नेतृत्व ने इस दावे को dismiss करते हुए कहा कि केवल तीन ने पार्टी छोड़ी है। लेकिन जनता के बीच शक की लहर दौड़ गई है।
जालंधर, लुधियाना और फगवाड़ा में protest हुए। आप कार्यकर्ताओं की नाराजगी दीवारों पर slogan लिखकर दिखाई दी। पुलिस मौके पर थी, लेकिन strict कम दिखी। यह लचर प्रतिक्रिया खुद एक संदेश थी — राज्य में तनाव बढ़ रहा है, लेकिन नियंत्रण की डोरें ढीली पड़ रही हैं। इस बीच, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति से मिलने का request है।
माना जा रहा है कि वे बगावत कर रहे सांसदों के खिलाफ संवैधानिक कार्रवाई की मांग कर सकते हैं। संजय सिंह भी उपराष्ट्रपति से मिलकर उनकी सदस्यता रद करने की बात उठाएंगे। यह सब ऐसे समय हो रहा है जब 2027 के election से पहले राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। क्या यह संकट आप के संगठन को कमजोर करेगा? क्या केंद्र की तुरंत सुरक्षा की move राज्य सरकार के खिलाफ एक संकेत थी? हरभजन सिंह की silence और सुरक्षा का खेल अभी जारी है।
जब तक हरभजन सिंह खुद कुछ नहीं कहते, हर अटकल बेबुनियाद है। लेकिन यह timing समय क्यों चुना गया?
सुरक्षा वापसी राज्य सरकार का अधिकार है, लेकिन केंद्र का तुरंत हस्तक्षेप राजनीतिक signal संकेत जरूर है।
आप कार्यकर्ता नाराज हैं — और बिलकुल सही। जब नेता पार्टी छोड़ें, तो मनोबल गिरता है।
हरभजन जी, अगर आपको खतरा है, तो speak बोलिए। चुप्पी से लोग और अधिक घबराते हैं।
हर बार ऐसे मामले में केंद्र और राज्य आमने-सामने आ जाते हैं। संवैधानिक तंत्र उलझ रहा है।
राजनीति में सुरक्षा अब केवल सुरक्षा नहीं रही — यह status दर्जा का प्रतीक बन गया है।
हरभजन ने मैदान पर हमेशा जोखिम लिया, लेकिन अब राजनीति के मैदान में उनकी position स्थिति अस्पष्ट है।
संसद सदस्यों की सुरक्षा पर सिर्फ राजनीतिक निर्णय नहीं होने चाहिए। यह एक गंभीर issue मुद्दा है।