एक राष्ट्र, एक पार्टी: अरोड़ा का भाजपा पर हमला और राजनीतिक नैतिकता के सवाल
कुरुक्षेत्र की राजनीति में एक बार फिर tension की लहर दौड़ गई है, जब थानेसर के कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा ने भाजपा पर खुलकर attack बोल दिया। उन्होंने न केवल राष्ट्रीय स्तर पर लोकतंत्र की स्थिति पर चिंता जताई, बल्कि उसकी आत्मा को कमजोर करने का आरोप भाजपा पर लगाया। उनका कहना था कि जिस तरह 'घोड़े-बाजारी' की राजनीति चल रही है, उससे जनता का विश्वास घट रहा है। यह सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि एक विचारधारा का प्रयोग है — "एक राष्ट्र, एक पार्टी"।
अरोड़ा ने आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा के statement पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें चड्ढा ने 'घुटन' महसूस करने की बात कही थी। विधायक ने तीखे लहजे में कहा कि अगर घुटन थी, तो सबसे पहले इस्तीफा देना चाहिए था। उन्होंने जोर दिया कि नैतिक ईमानदारी वही दिखती है जब कोई अपने पद को छोड़कर अगला कदम उठाए। क्या चड्ढा के लिए पार्टी का दरवाजा खुला था, लेकिन निर्णय की गहराई नहीं?
उन्होंने एक चौंकाने वाला उदाहरण भी पेश किया — recently एक ऐसे सांसद का जिक्र किया, जिन पर महज दस दिन पहले छापा पड़ा था, और फिर वे भाजपा में शामिल हो गए। अरोड़ा ने कहा कि ऐसे मामले में सवाल उठता है: क्या कार्रवाई तभी होती है जब वफादारी नहीं होती? वे बोले कि जो नेता पहले भाजपा को 'चोरों' की पार्टी कहते थे, आज उसी में हैं। क्या अवसरवाद राजनीति का नया नाम बन गया है?
हरियाणा के पांच विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग के मामले पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका मानना है कि दल बदलना अधिकार है, लेकिन responsibility भी है। अगर वे अपने मूल दल के विश्वास को तोड़ रहे हैं, तो कम से कम seat खाली करनी चाहिए थी। वे मांग करते हैं कि जनता के समर्थन का परीक्षण सीधे चुनाव में होना चाहिए, न कि कुछ वोट बदलकर।
इसके बीच, पुलिस इंस्पेक्टर के एक controversial ऑपरेशन पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। बिना वर्दी के कार्रवाई को उन्होंने अनुचित बताया और दुष्यंत चौटाला के साथ हुए व्यवहार को serious माना। उन्होंने मांग की कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ action होनी चाहिए। जब सुरक्षा कवर मिला हो, तो उसका उल्लंघन लोकतंत्र के खिलाफ अपराध है।
अगर दल बदलना अपराध नहीं है, तो क्या नैतिकता के नाम पर इस्तीफा देना pressure दबाव डालना नहीं है?
एक राष्ट्र, एक पार्टी — यह सिर्फ नारा नहीं, विचारधारा का खतरनाक रूप है।
दस दिन में छापे से शामिल होने तक का सफर? suspicious संदिग्ध नहीं लगता?
क्रॉस-वोटिंग करने वालों को इस्तीफा देना चाहिए — बिल्कुल सही। वरना जनादेश का विश्वासघात होता है।
लेकिन क्या राघव चड्ढा को घुटन नहीं हो सकती? नैतिकता कभी-कभी भावनाओं से भी टकराती है।
भाजपा ने कभी कहा था कि वे चोरों की पार्टी नहीं हैं। आज वे उन्हीं को अपनाने लगे हैं। क्या यह पाखंड नहीं?
अरोड़ा के सवाल तीखे हैं, लेकिन क्या कांग्रेस ने खुद ऐसा कभी नहीं किया? इतिहास देखना चाहिए।
बिना वर्दी के पुलिस कार्रवाई — यह protocol प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, चाहे किसी के खिलाफ हो।