जब सरकार नहीं गिरी, बल्कि पूरी की पूरी सरकार बदल गई
भारतीय politics में विचारधारा की जगह loyalty का बाजार चल रहा है। नेता पार्टियां बदलते हैं जैसे clothes बदले जाते हैं — चुनाव के मौसम में तो यह trend और भी साफ दिखती है। पहले यह दलबदल अकेले-अकेले होता था, लेकिन अब यह सामूहिक और योजनाबद्ध हो गया है। आम आदमी पार्टी के कई senator के बीजेपी में शामिल होने की खबर ने फिर से यह सवाल उठा दिया है: क्या अब दलबदल खुद एक strategy बन गई है?
इसी phrase की शुरुआत 'आया राम, गया राम' से हुई थी। 1967 में हरियाणा के विधायक गया लाल ने महज 9 घंटे में तीन बार party बदल डाली। यह घटना एक उदाहरण बन गई, जिसके बाद करीब 45 state सरकारें दलबदल के चलते गिर गईं। राजनीतिक अस्थिरता का यह दौर लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी थी।
फिर भी, कानून के बावजूद नाटक जारी रहा। 1980 में, हरियाणा के मुख्यमंत्री भजनलाल ने resignation दिए बिना पूरे मंत्रिमंडल और 40 विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो लिया। यानी सरकार नहीं collapsed , बल्कि पूरी की पूरी सरकार दूसरी ideology में merged हो गई। इसी तरह, 2020 में मध्य प्रदेश में 22 विधायकों के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सरकार बदल डाली।
कानून ने एक समय 1/3 सदस्यों के टूटने पर दलबदल को मान्यता दी, लेकिन 2003 में 91वें संशोधन ने इसे 2/3 किया। लेकिन राजनीति ने रास्ते ढूंढ लिए — जैसे voting के दौरान absent रहना या management के खेल से सरकार बचाना। जब पीवी नरसिम्हा राव की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया, तो पैसे के आरोप लगे। संसद की साख डगमगा गई।
आज के समय में दलबदल सिर्फ विचारों की बजाय power के लिए एक tool बन चुका है। गोवा और अरुणाचल में तो पूरी government ही पार्टी बदल गईं। राघव चड्ढा जैसे नेता सवाल कर रहे हैं कि क्या यह अब लोकतंत्र की reality बन गया है? कानून मजबूत हुए, लेकिन रास्ते भी निकलते रहे।
जब तक नेता personal gain व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता देंगे, तब तक लोकतंत्र कमजोर ही रहेगा।
क्या दलबदल पर पूर्ण प्रतिबंध संभव है, या यह भारतीय democracy लोकतंत्र का एक अटूट हिस्सा बन चुका है?
नेता बदलते हैं पार्टी जैसे मौसम के हिसाब से बदलते हैं jacket जैकेट।
कानून में clarity स्पष्टता तो है, लेकिन उसकी व्याख्या के तरीके हमेशा नए आते रहते हैं।
क्या यह सब 'थोक में' दलबदल वास्तव में spontaneous स्वतः होता है, या पहले से तैयार योजना होती है?
एक दिन जनता ऐसे नेताओं को चुनाव में reject अस्वीकार कर देगी जो विचार के बजाय सत्ता के पीछे भागते हैं।
1967 से 1971 के बीच 45 राज्य सरकारें गिरीं — यह आंकड़ा दलबदल की scale पैमाने को दिखाता है।