‘न्यायिक व्यवस्था में मानवीय दृष्टिकोण लाने वाले जज’: जस्टिस राजेश बिंदल की विदाई पर बोले CJI सूर्यकांत
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के निवर्तमान न्यायाधीश जस्टिस राजेश बिंदल को उनके brilliant career और technical innovation के लिए श्रद्धांजलि दी। जस्टिस बिंदल की विदाई के अवसर पर आयोजित औपचारिक hearing के दौरान, CJI ने उनके मामलों के unmatched rate और judicial integrity की प्रशंसा की।
फरवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट में appointed हुए जस्टिस बिंदल 15 अप्रैल, 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके जाने के साथ शीर्ष अदालत में vacant posts की संख्या दो हो गई है, जबकि कुल स्वीकृत सीटें 34 हैं। CJI ने उनके साथ अपने लंबे professional relationship को याद किया और कहा कि उनकी dedication की चर्चा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के दिनों से ही रही है।
CJI ने कहा, "हम दोनों मामलों के swift disposal के लिए जाने जाते थे, लेकिन मैं कभी उनकी बराबरी नहीं कर सका। उनकी disposal rate को पार करने का तो सवाल ही नहीं उठता।" अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी के अनुसार, हाईकोर्ट में अपने 12 साल के कार्यकाल में जस्टिस बिंदल ने लगभग 80,000 मामलों की सुनवाई की, जो average प्रति वर्ष 6,000 मामले बैठता है।
न्यायिक कार्य के अलावा, CJI ने उन्हें एक दूरदर्शी के रूप में सराहा जिन्होंने तकनीक को सुधार का medium बनाया। वे MedLEaPR सॉफ्टवेयर के मुख्य वास्तुकार थे, जो फोरेंसिक रिपोर्ट्स को standardized और secure बनाने के लिए विकसित किया गया था। 2023 में केंद्र ने इसे सभी राज्यों के लिए अनिवार्य कर दिया, और यह अब क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (CCTNS) के साथ एकीकृत है।
CJI ने जोर देकर कहा कि उनके judgments केवल कानूनी निष्कर्ष नहीं हैं, बल्कि वे उस जज की छवि पेश करते हैं जो व्यवस्थागत मुद्दों में human aspect को सामने लाता है। जस्टिस बिंदल ने अपने विदाई भाषण में rising burden का जिक्र करते हुए कहा कि बार और बेंच पर आराम करने की नहीं, बल्कि कर्तव्य की याद दिलाने की जरूरत है। उन्होंने patience पर जोर दिया, कहा कि आम आदमी सिर्फ यह चाहता है कि उसे heard ।
इतने मामले सुनना सिर्फ एक जज की efficiency कार्यक्षमता नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की जरूरत को दिखाता है।
MedLEaPR जैसे initiatives पहल के बारे में जानकर अच्छा लगा। तकनीक से judicial reforms न्यायिक सुधार की शुरुआत हो रही है।
जस्टिस बिंदल ने सही कहा — बेंच rest आराम की जगह नहीं है। यह जिम्मेदारी की जगह है।
एक जज के लिए human aspect मानवीय पहलू लाना सबसे बड़ी विरासत हो सकती है।
क्या सुप्रीम कोर्ट के vacancies रिक्त पद इतनी तेजी से भरे जाएंगे? यही बड़ा सवाल है।
सुनवाई में patience धैर्य रखना और लोगों को heard सुनना — यही तो असली न्याय है।