मैं कभी उनका मुकाबला नहीं कर सकता, रिकॉर्ड कैसे तोड़ेंगे; CJI सूर्यकांत ने किया जस्टिस बिंदल का सम्मान
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) decision देने के मामले में किसी के भी ज्ञान और गति को पहचानते हैं, लेकिन जब बात जस्टिस राजेश बिंदल की हो, तो खुद CJI सूर्यकांत ने कहा कि वे कभी भी उनका rivalry नहीं कर सकते। बुधवार को जस्टिस बिंदल के सेवानिवृत्ति के अवसर पर CJI ने उनकी तारीफ में कहा, 'मैं कभी भी उनका मुकाबला नहीं कर पाया, और उनका record तोड़ना तो बहुत दूर की बात थी।'
CJI ने याद किया कि वे और जस्टिस बिंदल दोनों ही quickly मामलों को निपटाने के लिए जाने जाते थे, लेकिन बिंदल इसमें असाधारण थे। उन्होंने कहा, 'वे बहुत ही जल्द मामलों के निपटारे के लिए जाने जाते थे।' एटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी के statement को सत्यापित करते हुए CJI ने कहा कि उनके साथ समय बिताना उनके लिए एक बहुमूल्य अनुभव रहा।
CJI ने एक निजी पल को भी साझा किया जब उनके भाई बीमार थे और लोग फिर भी जस्टिस बिंदल के पास बड़े विवादित मामले लेकर आते थे। उन्होंने कहा कि लोग उनकी honesty और dedication पर भरोसा करते थे। उनकी capability और बारीकियाँ समझने की आदत ने उन्हें विशेष स्थान दिलाया।
एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में, CJI ने बताया कि जब बिंदल पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में थे, तब उन्होंने मेडिको-लीगल रिपोर्ट्स और पोस्टमार्टम को कंप्यूटरीकृत करने के लिए एक ऐप विकसित किया। यह पहल पंजाब में शुरू हुई और बाद में सभी जिलों में mandatory कर दी गई। आज यह प्रणाली पूरी तरह से CCTNS से जुड़ी है, जिसे CJI ने 'पूरी व्यवस्था में बदलाव लाने वाली कोशिश' बताया।
जस्टिस बिंदल का जन्म 16 अप्रैल 1961 को हरियाणा के अंबाला में हुआ था। उन्होंने सितंबर 1985 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से अपने कानूनी करियर की शुरुआत की। 22 मार्च 2006 को वे जज बने और 12 साल के दौरान उन्होंने 80,000 मामलों की hearing की। एटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी ने इस आंकड़े की पुष्टि की, जो उनके अथक workload का प्रमाण है।
CJI सूर्यकांत ने कहा कि जस्टिस बिंदल न केवल एक उत्कृष्ट न्यायाधीश रहे, बल्कि प्रशासनिक reform में भी सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी contribution ने न्याय प्रणाली को तेज और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
80 हजार मामले? ये तो एक आम जज के मुकाबले दोगुना workload काम है। ऐसी लगन आजकल कहीं नजर नहीं आती।
जो इंसान मेडिको-लीगल रिपोर्ट्स को डिजिटल करने का सोच सकता है, वो सिर्फ न्याय नहीं, innovation नवाचार भी लाता है।
CJI ने कहा 'मैं कभी उनका मुकाबला नहीं कर सका' — इतनी बड़ी व्यक्ति की तारीफ में इतनी humility विनम्रता देखकर अच्छा लगा।
हरियाणा से आए एक ऐसे इंसान को देखकर गर्व होता है जिन्होंने सिस्टम में real change असली बदलाव किया।
क्या सुधारों के बावजूद आज भी कोई जज इतने मामले सुन पाएगा? pressure दबाव तो अब और बढ़ गया है।
एक ऐप बनाया और पूरे देश की व्यवस्था बदल दी। काम की impact असर देखिए — छोटे प्रयास भी बड़े नतीजे ला सकते हैं।