'नहीं घटेगी दक्षिण की शक्ति', अमित शाह ने समझाया तमिलनाडु, केरल समेत 5 राज्यों की सीटों का हिसाब
लोकसभा में महिला आरक्षण और delimitation पर चल रही चर्चा के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने दक्षिण भारत के राज्यों की चिंताओं को address करने का प्रयास किया। अमित शाह ने कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल जैसे पांच राज्यों का नाम लेकर बताया कि परिसीमन के बाद इनकी लोकसभा सीटें कितनी होंगी। उन्होंने साफ़ किया कि नए बिल के तहत दक्षिण की political power घटने वाली नहीं, बल्कि बढ़ने वाली है।
कर्नाटक के मामले में, अमित शाह ने बताया कि वर्तमान में इसके 28 सांसद हैं, जो लोकसभा के 543 सदस्यों में 5.15 प्रतिशत का representation करते हैं। बिल पारित होने के बाद यह संख्या 42 हो जाएगी, और प्रतिनिधित्व 5.14 प्रतिशत रहेगा। आंध्र प्रदेश, जिसके अभी 25 सांसद हैं, की सीटें 38 हो जाएंगी और प्रतिनिधित्व 4.60 से बढ़कर 4.65 प्रतिशत हो जाएगा। इसी तरह, तेलंगाना की 17 सीटें 26 हो जाएंगी, तमिलनाडु की 39 सीटें बढ़कर 59 हो जाएंगी, और केरल की 20 सीटें 30 हो जाएंगी।
अमित शाह ने जोर देकर कहा कि नए सदन में सांसदों की कुल संख्या 816 होगी, और दक्षिण के राज्यों का combined strength 129 से बढ़कर 195 सांसदों का हो जाएगा। इसका अर्थ है कि दक्षिण का लोकसभा में हिस्सा 23.76 प्रतिशत से बढ़कर 23.97 प्रतिशत हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ये figures उन्हीं कैबिनेट निर्णयों पर आधारित हैं जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंजूरी दी गई है।
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि कांग्रेस नेता वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी के सवालों का समाधान विस्तार से कल दिया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि विपक्ष को वॉकआउट करने के बजाय सदन में बैठकर response सुननी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि आने वाली जनगणना में जाति आधारित आंकड़े भी शामिल होंगे, लेकिन धर्म के आधार पर आरक्षण कोई option नहीं है।
अमित शाह ने यह भी समझाया कि लोकसभा की सीटें 850 तक क्यों बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि 50 प्रतिशत वृद्धि के बाद, 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी, जिससे 543 सीटें खुली रहेंगी। इस गणित के अनुसार, 816 वास्तविक संख्या होगी और 850 एक rounded-up संख्या है। उन्होंने परिसीमन आयोग पर भी चिंताएं दूर कीं और कहा कि पुराने कानून को ही बरकरार रखा गया है, जिसमें सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी।
तमिलनाडु के हिस्सेदारी में बढ़ोतरी होगी, लेकिन क्या ये real impact वास्तविक प्रभाव देगी? आरक्षण के मुद्दे पर तो डीएमके अभी भी संदेह में है।
23.76 से 23.97 प्रतिशत का बढ़ाव घटिया लगता है, लेकिन 129 से 195 के बीच का अंतर असली political weight राजनीतिक वजन बढ़ाएगा।
प्रियंका गांधी के बाद शाह का जवाब बहुत calculated गणना के साथ दिया गया। ये कोई भावनात्मक बहस नहीं, एक रणनीतिक प्रस्तुति थी।
क्या जाति जनगणना वाकई होगी? सरकार का ऐलान तो हो गया, लेकिन public trust जन भरोसा अभी भी कमजोर है।
850 का आंकड़ा rounded-up ऊपर की ओर समायोजित है? तो फिर इसे तत्काल प्रभाव के लिए कैसे लिया जा रहा है?
धर्म के आधार पर आरक्षण संविधान के खिलाफ है, ये बात सही है। लेकिन क्या ओबीसी के आंकड़े अब transparent पारदर्शी होंगे?