आसमान फिर से खुले: कुवैत और इजरायल ने उड़ानों को ली ग्रीन सिग्नल
पश्चिम एशिया के आकाश में एक धीमी लेकिन उम्मीद भरी सुबह छाई है। airspace खुलने के साथ, flights के रास्ते फिर से जुड़ रहे हैं। इजरायल और कुवैत ने अपना हवाई क्षेत्र खोल दिया है, एक ऐसा कदम जो यात्रियों और एयरलाइंस दोनों के लिए relief की सांस लाता है। विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव असीम आर महाजन ने शुक्रवार को दिल्ली में बताया कि खाड़ी क्षेत्र से भारत के लिए अतिरिक्त commercial उड़ानें चल रही हैं। 28 फरवरी के बाद से 12.38 लाख यात्री पहले ही भारत पहुंच चुके हैं — एक संख्या जो बताती है कि कितने लोगों को इन संकटग्रस्त routes से बचने की जरूरत थी।
अब जजीरा एयरवेज और कुवैत एयरवेज सीमित services फिर से शुरू करने जा रही हैं। ये उड़ानें कुवैत से भारत के लिए होंगी — एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम। इजरायल के गंतव्यों के लिए भी उड़ानें वापस आ रही हैं, जिनका उपयोग भारत आने वाले यात्री अपनी आगे की journey के लिए कर सकते हैं। ईरान के एयरस्पेस का हाल अभी भी अधूरा है: यह केवल cargo और चार्टर्ड उड़ानों के लिए खुला है। सऊदी अरब के दम्मम से भारत के लिए गैर-निर्धारित उड़ानें जारी हैं, लेकिन यह सब अस्थायी और अस्त-व्यस्त है।
इसी बीच, भारतीय दूतावास लगातार काम कर रहा है। अब तक 2,432 भारतीय नागरिकों को ईरान से निकालकर आर्मेनिया और अजरबैजान पहुंचाया गया है। इनमें 1,096 छात्र और 657 मछुआरे शामिल हैं — जिनकी निकासी कोई छोटी उपलब्धि नहीं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का कहना है कि क्षेत्र में स्थिति अभी भी tense बनी हुई है। हालांकि युद्धविराम है, लेकिन तनाव अभी खत्म नहीं हुआ।
दूतावास ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है: ईरान की यात्रा न करें। न हवाई मार्ग से, न सड़क मार्ग से। क्षेत्रीय tensions और परिचालन अनिश्चितताओं के कारण, अंतरराष्ट्रीय flights पर असर पड़ रहा है। जो लोग पहले से ईरान में हैं, उन्हें समन्वय के साथ निकलने की सलाह दी गई है। जहाजों के मामले में भी खतरा मौजूद है। 22 अप्रैल को ईरान ने दो विदेशी जहाजों को पकड़ा और एक पर गोलीबारी की।
खुशखबरी यह है कि एपामिनोंडास और यूफोरिया जैसे जहाजों पर सवार सभी भारतीय नाविक safe हैं। यूफोरिया पर 21 भारतीय नाविक हैं, और एपामिनोंडास पर एक। जहाजरानी मंत्रालय के निदेशक मनदीप सिंह रंधावा ने पुष्टि की कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक crew के रूप में सुरक्षित हैं। यह खबर उन परिवारों के लिए एक आश्वासन है जो रोज एक नए डर के साथ जी रहे थे।
अब तो धीरे-धीरे सब ठीक होगा, airspace एयरस्पेस खुलने से कई लोगों को फायदा मिलेगा।
क्या ये सीमित उड़ानें लंबे समय तक चल पाएंगी? क्षेत्र में tensions तनाव अभी भी बना हुआ है।
ईरान से निकासी का काम जारी है, लेकिन क्या भारतीय छात्रों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है?
एक भारतीय नाविक पर भी खतरा था, लेकिन वह safe सुरक्षित है — यही मायने रखता है।
कार्गो उड़ानें चल रही हैं, लेकिन यात्री उड़ानों में देरी क्यों? आर्थिक नुकसान तो बहुत हुआ है।
2,432 लोगों को निकालना आसान नहीं रहा होगा। दूतावास की मेहनत को सलाम।
अब तो यात्रा करने की सोची जा सकती है, लेकिन पहले एडवाइजरी जरूर पढ़ लेनी चाहिए।
हर उड़ान के पीछे एक कहानी होती है — अब वो कहानियां फिर से उड़ सकती हैं।