इटली ने इजरायल के साथ रक्षा समझौते रद्द किए, पोप लियो का समर्थन किया
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इजरायल के साथ सभी defense agreements को निलंबित करने की घोषणा करके मध्य पूर्व में बढ़ते tension के बीच एक बड़ा कदम उठाया है। इस फैसले के पीछे वर्तमान regional crisis और इसके वैश्विक impact को मुख्य वजह बताया गया है। यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच तनाव चरम पर है और होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से ऊर्जा supply में बाधा उत्पन्न हो रही है।
मेलोनी ने वेरोना में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह decision मौजूदा स्थिति को considering लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट नहीं किया कि यह निलंबन कब तक रहेगा, लेकिन यह संकेत है कि इटली अब diplomatic pressure के जरिए स्थिति को शांत करना चाहता है। रक्षा समझौतों में वह एक समझौता भी शामिल है जो स्वत: नवीनीकरण होने वाला था, जिसे अब रोक दिया गया है।
इसके साथ ही, मेलोनी ने होर्मुज जलडमरूमध्य को reopen की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल ऊर्जा markets के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक economic stability के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच peace talks को आगे बढ़ाने के लिए सभी पक्षों से प्रयास करने का आह्वान किया।
इस घोषणा के दौरान मेलोनी ने पोप लियो के प्रति अपनी एकजुटता भी व्यक्त की, जिन्हें हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने आलोचित किया था। उन्होंने कहा कि वह उस समाज में नहीं रहना चाहेंगी जहां religious leaders राजनीतिक नेताओं के direction में काम करें। यह बयान आंतरिक रूप से ट्रंप के रवैये की आलोचना भी है।
इटली का यह कदम पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी प्रशासन को दिए गए दूसरे setback के रूप में भी देखा जा रहा है। इससे पहले, इटली ने अमेरिकी बमवर्षकों को सिसिली के सिगोनेला एयरबेस का उपयोग करने से भी denied कर दिया था। इन कदमों से स्पष्ट है कि इटली अब क्षेत्रीय conflict में अपनी independent stance बनाए रखना चाहता है।
इस तरह के defense agreements रक्षा समझौते आमतौर पर लंबी अवधि तक चलते हैं, लेकिन अब इटली का यह रुख दिखाता है कि वह मानवीय संकट के आगे राजनीतिक सौदेबाजी नहीं करेगा।
हर बार जब अमेरिका कोई setback झटका खाता है, तो यूरोप के देश अलग रास्ता अपनाने लगते हैं। क्या यह वाकई स्वतंत्रता है या सिर्फ political pressure राजनीतिक दबाव?
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से दुनिया भर में तेल की prices कीमतें बढ़ेंगी। इटली का यह फैसला सिर्फ नैतिक नहीं, बल्कि economic concern आर्थिक चिंता का भी परिणाम है।
पोप का समर्थन करना अच्छा कदम है। धार्मिक नेताओं को राजनीति के चक्कर में नहीं घसीटना चाहिए। सम्मान तभी बना रहता है जब उनकी independence स्वतंत्रता बरकरार रहे।
क्या इस फैसले से वाकई peace talks शांति वार्ता आगे बढ़ेंगी? या फिर यह सिर्फ एक symbolic move प्रतीकात्मक कदम है जो कुछ हफ्तों में भूल जाया जाएगा?
इजरायल के साथ समझौता रद्द करना एक बड़ा risk जोखिम है। लेकिन इटली ने संदेश दे दिया है कि वह नैतिक जिम्मेदारी को राजनीतिक लाभ से ऊपर रखता है।