पीएम मोदी को आतंकवादी कहकर फंसे खरगे, बीजेपी ने चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आतंकवादी कहा, जिसके बाद राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे serious violation बताते हुए चुनाव आयोग से तत्काल action की मांग की है। बीजेपी का आरोप है कि खरगे का बयान चुनाव आचार संहिता के खिलाफ है और यह लोकतंत्र की dignity को नुकसान पहुंचाता है।

खरगे ने चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह टिप्पणी की थी, जहां उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी सरकारी machinery का दुरुपयोग कर विपक्ष को intimidate कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका तात्पर्य शाब्दिक अर्थ में terrorism नहीं, बल्कि fear फैलाने वाली नीतियों से था। फिर भी, बीजेपी उनके शब्दों को जानबूझकर आक्रामक मान रही है।

बीजेपी ने आयोग को दिए गए ज्ञापन में मांग की कि खरगे को सार्वजनिक apology मांगने का निर्देश दिया जाए और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत penal action शुरू की जाए। इसके अलावा, उनके बयान को मीडिया और सोशल मीडिया से remove और उसके प्रसार पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।

बीजेपी के प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, किरेन रिजिजू और अर्जुन राम मेघवाल शामिल हैं, जो बुधवार को चुनाव आयोग से मिलकर इस मुद्दे को उठाएंगे। यह move ऐसे समय आया है जब चुनावी माहौल में tension बढ़ रहा है और राजनीतिक दलों के बीच तीखी टकराहट देखी जा रही है।

खरगे की टिप्पणी एआईएडीएमके के बीजेपी के साथ गठबंधन की आलोचना के संदर्भ में आई थी। उन्होंने criticism की कि सत्तारूढ़ पार्टी विपक्ष को बदनाम करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। इस मामले ने न केवल दोनों पार्टियों के बीच तीखापन बढ़ाया है, बल्कि चुनाव आयोग के लिए भी एक test खड़ी कर दी है कि वह तटस्थता बनाए रखते हुए कैसे response देता है।

प्रतिक्रियाएँ 7

  • सत्येंद्र_जी

    एक तरफ तो free speech की बात होती है, लेकिन जैसे ही कोई बड़ा शब्द बोलता है, तुरंत आयोग को घेर लिया जाता है।

  • प्रजा_की_आवाज़

    खरगे को शायद word choice का एहसास था, लेकिन बीजेपी ने इसे पूरी तरह political advantage में बदल दिया।

  • निरीक्षण

    चुनाव आयोग को तटस्थ रहना चाहिए, लेकिन क्या वाकई ऐसे statements चुनावी नियमों का उल्लंघन करते हैं?

  • राजदीप

    अगर आप सरकारी agencies का दुरुपयोग कह रहे हैं, तो फिर intimidation करने का आरोप गलत क्यों है?

  • संजय_मिश्र

    हर बार चुनाव आते हैं, तो एक नया controversy खड़ा हो जाता है। अब आयोग क्या decision करता है, यही देखना है।

  • कल्पना_23

    क्या public trust सिर्फ शब्दों पर टिकी है? या असली मुद्दे अभी भी अनसुने रहते हैं?

  • अनिल_कुमार

    खरगे को स्पष्ट करना चाहिए था, लेकिन बीजेपी का ज्ञापन टालमटोल की रणनीति लग रहा है।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

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