PMGSY Extension 2028: ग्रामीण इलाकों में बिछेगा सड़कों का जाल, 2028 तक जारी रहेगी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना
rural इलाकों में सड़कों का जाल बिछाने के लिए केंद्र सरकार ने अपनी कमर कस ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने extension के तहत प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-3 (PMGSY-3) को मार्च 2028 तक आगे बढ़ा दिया है, जिसके तहत गांवों को कृषि markets , उच्च विद्यालयों और अस्पतालों से जोड़ने वाले मुख्य मार्गों को मजबूत किया जाएगा।
इस योजना पर कुल 83,977 करोड़ रुपये का allocation किया गया है, जो उन क्षेत्रों में अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा करने में मदद करेगा जहां कनेक्टिविटी अभी भी एक challenge बनी हुई है। मैदानी इलाकों में सड़क और पुल निर्माण की समय-सीमा अब मार्च 2028 तक है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में पुलों के लिए अवधि मार्च 2029 तक extended गई है, क्योंकि वहां की कठिन भौगोलिक स्थिति निर्माण को धीमा करती है।
सरकार का तर्क है कि इस योजना से access के स्तर पर बड़ा बदलाव आएगा। ग्रामीण आबादी के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और बाजारों तक पहुंच आसान होगी, जिससे उनकी आमदनी में improvement होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, परिवहन के समय और लागत में कमी से ग्रामीण उत्पादों को बेहतर बाजार मिलेगा।
इस योजना के निर्माण चरण से employment के अवसर प्रत्यक्ष रूप से पैदा होंगे, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से ग्रामीण उद्यमों और सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि यह कदम ग्रामीण-शहरी gap को कम करेगा और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में एक ठोस step साबित होगा।
इस विस्तार से न केवल बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। लंबी अवधि तक योजना जारी रखना इस बात का संकेत है कि सरकार ग्रामीण विकास को priority दे रही है, खासकर ऐसे क्षेत्रों में जहां भौगोलिक चुनौतियां निर्माण कार्य को रोकती रही हैं।
इतने बड़े budget बजट के बावजूद, क्या सच में सड़कें गांव तक पहुंचेंगी या फिर ठेकेदारों के खाते में जाएंगी?
पहाड़ी इलाकों में पुलों के लिए 2029 तक का विस्तार makes sense समझ में आता है, वहां की मिट्टी और बारिश के कारण काम धीमा चलता है।
क्या इस योजना के तहत सड़कों की गुणवत्ता को लेकर कोई monitoring निगरानी तंत्र है? पहले भी कई जगह सड़कें बनते ही टूट गईं।
कनेक्टिविटी बढ़ने से गांवों में डिलीवरी सर्विसेज भी आ सकती हैं। यह छोटे उद्यमों के लिए बड़ा अवसर है।
सरकार कहती है inclusive समावेशी विकास, लेकिन जब तक वंचित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंचेंगी, तब तक यह सिर्फ नारा है।
मार्च 2028 तक का लक्ष्य देखकर लगता है कि यह election चुनाव से पहले घोषित किया गया है। वक्त बताएगा कि काम असली है या सिर्फ घोषणा।
हमारे गांव में तो अभी तक कच्ची सड़क है। उम्मीद है कि इस scheme योजना में हमारा नाम भी आएगा।