गडकरी का तूफान: यूनियन मत भूलो मजदूरों का हिसाब
नागपुर के एनआईटी मैदान पर आयोजित मजदूर महोत्सव में union को लेकर तीखी चेतावनी गूंजी। केंद्रीय मंत्री नितीन गडकरी ने कहा कि कई worker संगठन अब politics में उलझ गए हैं, जबकि उनकी असली ज़िम्मेदारी कामगारों के rights , सुविधाओं और आर्थिक हिसाब की मांग में लगी होनी चाहिए। गडकरी ने सीधे तौर पर कहा: कामगारों को इन यूनियनों से हिसाब मांगना चाहिए। यह बयान किसी आम नौकरशाह के नहीं, बल्कि किसी ऐसे नेता के हैं जो खुद एक समय organization के मैदान में उतर चुके हैं।
गडकरी ने अपने अनुभव को share करते हुए कहा कि वे प्रदेश स्तर पर इंटक में काम कर चुके हैं, congress से जुड़े उस प्रभावशाली संगठन में। लेकिन वैचारिक मतभेद के बावजूद, उन्हें बैठकों में बुलाया जाता था क्योंकि वे मजदूरों के लिए health , education और economic विकास की बात करते थे — न कि सत्ता के खेल में शामिल होने के लिए। आज वही व्यक्ति चेतावनी दे रहा है: यूनियन अपना मूल उद्देश्य भूल रहे हैं।
विकास के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि केवल speech से कुछ नहीं होता। धरातल पर action होना चाहिए। उन्होंने लोकसभा चुनाव में नागपुर में मिली सबसे बड़ी लीड का ज़िक्र करते हुए कहा कि फिर भी उन्होंने सभी विधानसभा क्षेत्रों को बराबर फंड दिया। यह बात न सिर्फ विकास के दावे को बल देती है, बल्कि एक संदेश भी देती है: राजनीति से परे, development सबका हक है।
उत्तर नागपुर के slum क्षेत्र के मजदूरों के लिए housing दिलाने की घोषणा ने भावनाओं को स्पर्श किया। गडकरी का तर्क स्पष्ट है: यदि यूनियन राजनीति में खो जाएंगे, तो मजदूरों की आवाज धुंधली पड़ जाएगी। जबकि उन्हें welfare , गरिमा और पारदर्शिता की ज़रूरत है। यह बहस सिर्फ नागपुर की नहीं, पूरे देश के मजदूर आंदोलन की है।
यूनियनों को सच में हिसाब देना चाहिए। कितने फंड आए, कहाँ गए?
सही कहा गडकरी ने। अब तो यूनियन भी चुनावी tool उपकरण बन गए हैं।
लेकिन सरकार भी तो कामगारों के लिए कुछ ठोस करे। promise वादे हर बार होते हैं।
आर्थिक पारदर्शिता न हो तो भ्रष्टाचार पैर पसारता है।
गडकरी ने आज वही कहा जो आरएसएस सदियों से कहता आया है।
मजदूर आंदोलन को फिर से जनआंदोलन बनाना होगा।
कांग्रेस से जुड़े संगठनों पर टिप्पणी तो राजनीतिक लगी।
महिला मजदूरों के लिए कोई scheme योजना सुनाई नहीं दी।