'PM मोदी से कोई इंदिरा गांधी की तरह कुर्सी नहीं छीन रहा..', प्रियंका गांधी पर कंगना रनौत ने किया पलटवार

महिला reservation संशोधन विधेयक को लेकर संसद में गहन बहस हुई, जहां कांग्रेस और बीजेपी के बीच तीखी clash देखने को मिली। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सरकार पर लोकतंत्र को खतरे में डालने का accusation लगाया, जिसका तुरंत जवाब बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी democratic तरीके से चुने गए नेता हैं, और वे उसी system को क्यों खत्म करेंगे जिसने उन्हें सत्ता दी?

कंगना ने कहा कि nobody इंदिरा गांधी की तरह पीएम मोदी की कुर्सी पर कब्जा नहीं करने आ रहा है, जिसके कारण वे लोकतंत्र को खत्म करने की need महसूस करें। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब भी सरकार कुछ अच्छा करती है, तो कांग्रेस के पेट में चूहे दौड़ने लगते हैं। उन्होंने प्रियंका गांधी के statement पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र खत्म करने की बात करना बस भ्रम फैलाने की कोशिश है।

महिला आरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए कंगना ने फिल्म 'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे' के प्रसिद्ध dialogue का जिक्र किया और कहा कि आज सरकार भारत की बेटियों से कह रही है – 'सारे पिंजरे टूट गए हैं, सारी दीवारें टूट चुकी हैं, जाओ बेटियों... जी लो अपनी जिंदगी'। उन्होंने कहा कि यह step महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ऐतिहासिक है और सरकार को इसके लिए धन्यवाद दिया।

परिसीमन पर उठाए गए issue को लेकर उन्होंने कहा कि यह कोई बीजेपी की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक constitutional प्रक्रिया है जो हर 10 साल में होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सोनिया गांधी की तरह 30 साल तक आरक्षण विधेयक को लटकाए रखना चाहिए था? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की urgency इसलिए है क्योंकि वे वह कर रहे हैं जो पिछले 60 साल में कोई नहीं कर पाया।

इस बहस ने संसद में न केवल policy मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया, बल्कि राजनीतिक posture और आरोप-प्रत्यारोप के तापमान को भी बढ़ा दिया। जहां एक तरफ महिलाओं के अधिकारों का सवाल है, वहीं दूसरी ओर लोकतंत्र और संविधान की व्याख्या पर भी तीखी debate छिड़ी हुई है।

प्रतिक्रियाएँ 6

  • सच्चिदानंद

    अरे भाई, कुर्सी के लिए लोकतंत्र को खतरे में डालने की बात करना तो सिर्फ अलंकार है। असली concern तो यह होनी चाहिए कि आरक्षण सच में कैसे लागू होगा।

  • माया_वती

    कंगना का डायलॉग तो जमा दिया, लेकिन क्या फिल्मी बातों से real change आएगा? महिलाओं को अब भी access और संसाधनों की कमी है।

  • दिल्लीवाला

    परिसीमन हर 10 साल में होता है, ये सच है। लेकिन इस बार की timing पर सवाल तो बनता है। क्या ये सिर्फ political advantage के लिए है?

  • नीतिज्ञ

    इतने साल बाद आरक्षण लाने में ही delay क्यों लगी? लेकिन अब आने से बेहतर है। बस इसे properly से लागू करना होगा।

  • राजभाषा

    लोकतंत्र के नाम पर fear फैलाना बंद करो। जो elected हैं, उन्हें काम करने दो। लेकिन निगरानी भी जारी रखनी चाहिए।

  • प्रतिभा2024

    प्रियंका गांधी ने जो कहा, उसका intent तो लोकतंत्र की रक्षा करना था, लेकिन कंगना के जवाब ने बहस को personal स्तर पर ले जा दिया।

यह लेख तथ्यों पर आधारित है और अंग्रेज़ी सीखने के लिए पुनर्रचित किया गया है; पाठक प्रतिक्रियाएँ विविध दृष्टिकोणों के उदाहरण हैं।

[email protected]